Russia Vs Ukraine: यूक्रेन में सत्ता बदलना लगभग तय

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रूसी सेना जंग (Russia Vs Ukraine) के दूसरे दिन ही यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंच चुकी है। वहीं NATO चीफ से लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति तक मिलिट्री एक्शन से पीछे हट गए हैं। उन्होंने कहा है कि यूक्रेन को अपनी लड़ाई (Russia Vs Ukraine) खुद लड़नी होगी। बेबस यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है, ‘मैं रूस का नंबर एक टारगेट हूं, मेरा परिवार दूसरे नंबर का टारगेट है।’ जिसके बाद रूस के यूक्रेन पर कब्जे के कयाद तेज़ हो गए हैं।

सवाल उठ रहे हैं कि अगले 24 घंटे में सिनेरियो क्या होंगे? क्या यूक्रेन के राष्ट्रपति के पास अब और कोई विकल्प बचे हैं? क्या जंग अपने अंजाम के करीब है? विशेषज्ञों की राय में रूस के हमले के बाद यूक्रेन में सत्ता परिवर्तन लगभग तय है। इसके पीछे वह रूसी सेने के यूक्रेन की राजधानी कीव तक पहुंचने को वजह बता रहे हैं।

माना जा रहा है कि अगले कुछ घंटों में रूसी सेना के कमांडो दस्ते प्रेसिडेंट ऑफिस पर कब्जा करके राष्ट्रपति जेलेंस्की को पकड़ सकते हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मिलिट्री ऑपरेशन का आदेश देते हुए कहा था कि हम अपने पड़ोसी यूक्रेन पर कब्जा नहीं करना चाहते। पुतिन का यह बयान साफ इशारा है कि यूक्रेन पर रूस पूरी तरह कब्जा नहीं करेगा, बल्कि यूक्रेनी सेना को खत्म करके सत्ता परिवर्तन करेगा।

वहीं मौजूदा सिनेरियो बता रहा है कि बिना बाहरी सपोर्ट के यूक्रेन अब ज्यादा देर रूस का मुकाबला नहीं कर सकता है। ऐसे में राष्ट्रपति जेलेंस्की के पास तीन रास्ते हैं। वो हार मानकर समर्पण कर दें, देश छोड़कर भाग जाएं या रूसी सेना के हाथों गिरफ्तार हो जाएं।

रूस और यूक्रेन की जंग अंजाम के करीब इसलिए बताई जा रही है क्योंकि NATO ने सैन्य कार्रवाई से इनकार कर दिया है। दूसरी वजह आधी-अधूरी आर्थिक पाबंदी और यूक्रेन की कमजोर मिलिट्री है। NATO से लेकर अमेरिका तक ने रूसी हमले की कड़ी निंदा की है, लेकिन यूक्रेन की मदद के लिए मिलिट्री भेजने से भी साफ इनकार कर दिया है। बिना मिलिट्री की मदद के यूक्रेन ये युद्ध ज्यादा दिन नहीं खींच सकता।

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यूक्रेन की इस स्थिति की एक वजह रूस पर आधी अधूरी आर्थिक पाबंदी भी है। अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, जापान, यूरोपियन यूनियन और ऑस्ट्रेलिया ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। हालांकि, ये आर्थिक पाबंदी भी आधी-अधूरी है, जिससे रूस को कोई खौफ नहीं है। रूस को सबसे बड़े बैंकिंग सिस्टम SWIFT से बाहर नहीं निकाला है और पुतिन पर भी रोक नहीं लगाई है। यही वजह है कि पुतिन ने यूक्रेन में फुल-फ्लेज्ड वार का आदेश दे दिया।

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